अगर आप किसी और के सपनों की एक झलक देख पाए तो आप क्या देखेंगे ? हमें लोगों और वातावरण से भरे हुए अच्छे अच्छे दृश्य होंगे या फिर सिर्फ कुछ रंग और आवाजें है। दूसरों के सपनों को देख पाने का विचार कुछ नामुमकिन सा लगता है । पर वैज्ञानिक इसे सच्चाई बनाने के बहुत नजदीक हैं , वह नींद मैं कैसे आपके विचारों को देख सकते हैं ? क्या यह हमें अपने सपनों को समझने में मददगार साबित होगा ? और इसके क्या खतरे हो सकते हैं ?
![]() |
| prakash kumar kacher |
साल 2017 में वैज्ञानिक डेनियल ऑडील ने सपनों को डिजिटल सूचना में बदलने का एक तरीका खोजा एक तरफ जहां उनकी टीम हमारे सपनों के स्वभाव को जानने के लिए उत्साहित थे वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसके होने वाले असर को लेकर चिंतित थे जैसे कि इस डिजिटल सूचना को हैक कर पाने में कितना समय लगेगा हम रात करीब 2 घंटे सपने देखने में बिताते हैं। जिनमें हम पांच से छह सपने देखते हैं , पर उठने के कुछ सेकंड के बाद ही हम उनमें से 95% सपने भूल चुके होते हैं , नतीजा हर सुबह हम अपने सपनों में देखे गए कुछ विचित्र कहानियों के टुकड़े जोड़ने में लगे रहते हैं जिससे हम उनका मतलब निकाल सकें।
सालों से ही लोग इस रहस्य को जानने की कोशिश कर रहे हैं , की हम सपने क्यों देखते हैं ? न्यूरोलॉजिस्ट सिगमंड फ्रायड के अनुसार सपने दबे हुए सेक्सुअल और आक्रामक भावनाओं का द्वार होते हैं साईकास्ट्रिक हरिओम ने सपनों को एक शुद्ध परिभाषा की तरह देखा है , जो कि हमारी उन समस्याओं को सुलझाने में मदद करती है जो कि हमें तब होती है जब हम जागे होते हैं। वहीं दूसरी तरफ हावर्ड के साइकेट्रिस्ट जेएल ऑप्शन और और रोबोट की सपनों को लेकर कुछ अलग सोच थी। उनके अनुसार सपने और कुछ नहीं बल्कि गहरी नींद में हो रही न्यूरल क्रियाओं को समझने का प्रयास है।
पर यह सब सिर्फ सिद्धांत है अगर हम अपने सपनों की गहराइयों में जाना चाहते हैं, तो हमें उन पर ध्यान देने का तरीका ढूंढना होगा और यह हमें वापस डेनियल पर ले जाता है डेनियल ने सोचा कि सोए हुए व्यक्ति के बाहों टांगो और ठोड़ी से इलेक्ट्रॉन को जोड़ना सपनों को रिकॉर्ड करने का सबसे अच्छा तरीका है।
क्या हो अगर अँधेरा पूर्णतः समाप्त हो जाय ?
जब हम अपनी सबसे गहरी नींद यानि अगर ई एम राइडर ऑयल मोमेंट में पहुंचते हैं तब भी हमारा मस्तिष्क नरवल इंपल्स भेजता है यह हमारे शारीरिक गतिविधियों को हमारे सपनों में दर्शाते हैं इलेक्ट्रॉन इन इंपल्सो को नाप कर जानकारी इकट्ठे करते करते हैं और इसे एक तार से जोड़ देते हैं जो कि सोए हुए व्यक्ति की गतिविधियों की नकल करता है । इस टीम ने छह इलेक्ट्रॉन को व्यक्तियों के मुंह और गले से जोड़ा ताकि उसकी भाषा को समझा जा सके।
अब और इससे भी आगे जाने के लिए वैज्ञानिकों का एक ड्रीम टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह मस्तिष्क के विजुअल सिस्टम को टैप करके मस्तिष्क की भाषा शारीरिक गतिविधियों और सपनों के दृश्यों को रिकॉर्ड करना चाहते हैं उनका मानना है कि 10 से 20 सालों में लोग इस टेक्नोलॉजी से अपने सपनों को अपने कंप्यूटर या स्मार्ट फोन में रिकॉर्ड करके में देख पाएंगे।
क्या हो अगर मधु मक्खियाँ पूर्णतः समाप्त हो जाए ?
पर इन सब का क्या फायदा होगा ? हम अपने सपनों को देख तो पाएंगे पर क्या यह हमें अपने आप को समझाने में मदद करेगा ? हम अपने सपनों का गलत मतलब भी तो निकाल सकते हैं ? और इन सब गलत मतलब हो जीवन का आधार भी बना सकते हैं और अपने सपनों को डिजिटलाइज करना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। और अगर किसी ने हमारी डिजिटलाइज सूचना को हैक करने का तरीका ढूंढ लिया तो। वह हमारे विचारों में शामिल होकर हमारे लिए गए फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं , यह में हमारे किसी शर्मनाक विचार को क्लिक करके ब्लैकमेल भी कर सकते हैं।
कैसी होगी 50 साल बाद कि दुनिया ?
तो शायद हमारे सपनों की सबसे अच्छी जगह हमारे मस्तिष्क में ही है हमारे लिए यह पता लगाना ज्यादा सही रहेगा कि हम अपने सपनों को काबू में कैसे करें बजाय इसके कि हम उन्हें रिकॉर्ड कैसे करें।
तब तक लिए बहुत-बहुत नमस्कार आपको हमारा लेख कैसे लगा और आप इसमें और क्या चाहते हैं हमको कमेंट करके जरूर बताएं हमको आपके विचारों का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता धन्यवाद दोस्तों।

0 टिप्पणियाँ